देस नूँ चल्लो
देस नूँ चल्लो
देस माँगता है क़ुर्बानियाँ
कानूं परदेसां विच रोलिये जवानियाँ
ओय देस नूं चल्लो ...
मातृभूमि ने हमें बुलाया है अब जाना होगा
ज़ंजीरों में क़ैद है वो उसे छुड़ाना होगा
अब ना सहेंगे हम गैरों की गुलामियाँ
देस नूं चल्लो ...
अपने हाथों से हम लिखेंगे अपनी तक़दीरें
हमें बदलनी होंगी इन हाथों की सभी लकीरें
ओ चक्क ले बंदूकां पैजा टूटके ओ हाणियाँ ओय
देस नूं चल्लो ...
जहाँ पे दी गुरु गोविन्द सिंघ नें बेटों की क़ुर्बानी
मिट गई देश की खातिर जहाँ पे झाँसी वाली रानी
चलो वहाँ लिख दें आज़ादी की कहानियाँ ओय
देस नूं चल्लो ...
जोगिया वे जोगिया हाय वे सोणे जोगिया
हो रब कौलों मंगा
रब कौलों मंगा होर की सोणेया
साड्डियां दुआवां तैनूं जी सोणेया
हाय तेरा लश्कारा तू है चाँद हमारा
रब कौलों मंगा ...
छुप छुप देखती हूँ तेरी तस्वीर को हो
कुछ हो गया है रांझे तेरी इस हीर को
रब जाणे कित्ता ए तू की सोणेया
साड्डियां दुआवां ...
अबके बरस जाने रुत कैसी आई है हाँ
प्यार वाले रंग दी मैं चुन्नी रंगवाई है
मैं तो बनी हूँ तेरे लई सोणेया
साड्डियां दुआवां ...
मेर रंग दे बसंती चोला
हो आज रंग दे हो माँ ऐ रंग दे
मेर रंग दे बसंती चोला
आज़ादी को चली ब्याहने दीवानों की टोलियाँ
खून से अपने लिखे देंगे हम इंक़लाब की बोलियाँ
हम वापस लौटेंगे लेकर आज़ादी का डोला
मेर रंग दे ...
ये वो चोला है के जिस पे रंग न चढ़े दूजा
हमने तो बचपन से की थी इस चोले की पूजा
कल तक जो चिंगारी थी वो आज बनी है शोला
मेर रंग दे ...
सपनें में देखा था जिसको आज वही दिन आया है
सूली के उस पार खड़ी है माँ ने हमें बुलाया है
आज मौत के पलड़े में जीवन को हमने तौला
मेर रंग दे ...
मैंनू चा चढ़ेया मैंनू जा फड़ेया
गिद्दा पान्नी आं मैं भंगड़ा तू पा अड़ेया
मौजां कर कुड़िये
कित्थे लंग ही न जावे सोणी रुत अड़िये
ओ की करी जान्नां एं क्यों मरी जान्नां एं
की करी जान्नां एं ओ क्यूं मरी जान्नां एं
ओए की करी जान्ना एं क्यों मरी जान्ना एं
ऐसे ना बुजुर्गों की इज़्ज़तें उछाल ओय
पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल ओय
ओ की करी ...
हल चलाए तूने ओय तूने फ़सल उगाई
कैसे कोई ले आएगा ये है तेरी कमाई
तोड़ ग़ुलामी की ज़ंजीरें बेबस हो ना ऐसे
तू है भारत माँ का बेटा भूल गया ये कैसे
हुण नहीं अकेला अस्सी सारे तेरे नाल ओय
पगड़ी संभाल ...
ग़म ना कर चमकेगी ओय तकदीर ये तेरी मेरी
आज़ादी का उगेगा सूरज जाएगी रात अंधेरी
ये धरती तेरी है पगले इसपे तेरा राज है
सुन ओय जट्टा तेरी पगड़ी तेरे सर का ताज है
ओय दे दे जवाब सीधा कर ना सवाल ओय
पगड़ी संभाल ...
देस नूँ चल्लो
देस माँगता है क़ुर्बानियाँ
कानूं परदेसां विच रोलिये जवानियाँ
ओय देस नूं चल्लो ...
मातृभूमि ने हमें बुलाया है अब जाना होगा
ज़ंजीरों में क़ैद है वो उसे छुड़ाना होगा
अब ना सहेंगे हम गैरों की गुलामियाँ
देस नूं चल्लो ...
अपने हाथों से हम लिखेंगे अपनी तक़दीरें
हमें बदलनी होंगी इन हाथों की सभी लकीरें
ओ चक्क ले बंदूकां पैजा टूटके ओ हाणियाँ ओय
देस नूं चल्लो ...
जहाँ पे दी गुरु गोविन्द सिंघ नें बेटों की क़ुर्बानी
मिट गई देश की खातिर जहाँ पे झाँसी वाली रानी
चलो वहाँ लिख दें आज़ादी की कहानियाँ ओय
देस नूं चल्लो ...
जोगिया वे जोगिया हाय वे सोणे जोगिया
हो रब कौलों मंगा
रब कौलों मंगा होर की सोणेया
साड्डियां दुआवां तैनूं जी सोणेया
हाय तेरा लश्कारा तू है चाँद हमारा
रब कौलों मंगा ...
छुप छुप देखती हूँ तेरी तस्वीर को हो
कुछ हो गया है रांझे तेरी इस हीर को
रब जाणे कित्ता ए तू की सोणेया
साड्डियां दुआवां ...
अबके बरस जाने रुत कैसी आई है हाँ
प्यार वाले रंग दी मैं चुन्नी रंगवाई है
मैं तो बनी हूँ तेरे लई सोणेया
साड्डियां दुआवां ...
मेर रंग दे बसंती चोला
हो आज रंग दे हो माँ ऐ रंग दे
मेर रंग दे बसंती चोला
आज़ादी को चली ब्याहने दीवानों की टोलियाँ
खून से अपने लिखे देंगे हम इंक़लाब की बोलियाँ
हम वापस लौटेंगे लेकर आज़ादी का डोला
मेर रंग दे ...
ये वो चोला है के जिस पे रंग न चढ़े दूजा
हमने तो बचपन से की थी इस चोले की पूजा
कल तक जो चिंगारी थी वो आज बनी है शोला
मेर रंग दे ...
सपनें में देखा था जिसको आज वही दिन आया है
सूली के उस पार खड़ी है माँ ने हमें बुलाया है
आज मौत के पलड़े में जीवन को हमने तौला
मेर रंग दे ...
मैंनू चा चढ़ेया मैंनू जा फड़ेया
गिद्दा पान्नी आं मैं भंगड़ा तू पा अड़ेया
मौजां कर कुड़िये
कित्थे लंग ही न जावे सोणी रुत अड़िये
ओ की करी जान्नां एं क्यों मरी जान्नां एं
की करी जान्नां एं ओ क्यूं मरी जान्नां एं
ओए की करी जान्ना एं क्यों मरी जान्ना एं
ऐसे ना बुजुर्गों की इज़्ज़तें उछाल ओय
पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल ओय
ओ की करी ...
हल चलाए तूने ओय तूने फ़सल उगाई
कैसे कोई ले आएगा ये है तेरी कमाई
तोड़ ग़ुलामी की ज़ंजीरें बेबस हो ना ऐसे
तू है भारत माँ का बेटा भूल गया ये कैसे
हुण नहीं अकेला अस्सी सारे तेरे नाल ओय
पगड़ी संभाल ...
ग़म ना कर चमकेगी ओय तकदीर ये तेरी मेरी
आज़ादी का उगेगा सूरज जाएगी रात अंधेरी
ये धरती तेरी है पगले इसपे तेरा राज है
सुन ओय जट्टा तेरी पगड़ी तेरे सर का ताज है
ओय दे दे जवाब सीधा कर ना सवाल ओय
पगड़ी संभाल ...





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