
कितनी मुश्किल से कटी कल की मेरी रात न पुछ
दिल से निकली हुई होटों में दबी न पूछ
वो किस अदा से मेरे जज़्बात न पुछ
वक़त जो बदले तो इंसान बदल जाते हैं
क्या नहीं दिखलाते यह गर्दिश -इ- हालात न पूछ
वो किसी का हो भी गया और मुझे खबर न हुई
किस तरह पल में मुझे बेगाना कर दिया
उसने किस तरह अपनों से खाई है मैने मात न पूछ
अब तेरा प्यार नहीं है तो सनम कुछ भी नहीं
कितनी मुसकिल से बनी थी दिल की काएनात न पूछ
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आज रात पर नूर है …
क्योंकि चाँद पर उसको गरूर है …
हम किस पर गरूर करे …
हमारा चाँद ही हमसे दूर है .
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मोहब्बत के भी कुछ अंदाज होते है ,
जागती आँखों में भी कुछ ख्वाब होते है …
जरुरी नहीं की गम में ही आंसू निकाले…
मुस्कराती आँखों में भी सैलाब होते है .
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उन्होंने देखा और आसू गिर पड़े ,
भारी बरसात में जैसे फल गिर पड़े ,
दुःख ये नहीं कि उन्होंने हमें अलविदा कहा ,
दुःख तो ये है कि उसके बाद वो खुद भी रो पड़े |
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इन उदास मुस्कराहटों के पीछे ,
दुम के रेले है ,ये तुम्हे क्या बताये ,
कि तुम बिन हम कितने अकेले है |
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आहों में तेरी खोया था मैं ,
तेरी जुल्फों के निचे सोया था मै ,
नींद खुली तब जब तेरे सपनों में ,
खोया था मैं |