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Sunday, July 4, 2010

dil ki hasti bhikhar gayee hoti aur,

dil ki hasti bhikhar gayee hoti aur,

ruh ke zakham bhar gaye hote,

jindagi dosto ki ammant hai,

varna hum to kabke mare gaye hote



pyar karne wale ki kismat buri hoti hai,

har mulaquat judai ki ghadi hoti hai,

agar waqt mile to zara rishtey ki kitab padhe lena,

dosti har rishtey se badi hoti hai.........
















Tum Bewafa na hothi

to Mein Shayar na Hotha,

Mein Shayar na Hotha,

to Meri yeh Shayari na Hoti,

Meri Shayari na Hothi,

to Tum Jaise Sunney Walay na Hoti..
.


i love u vd

usney kaha, bas itni mulaqat bohaut hai
ro ro key kaha, theharo abhi raat bohaut hai
aansoo merey thum jaaein, to phir shouq sey jana
aisey mein kahan jaogey, barsaat bohaut hai
IgC8

bachapna,

bachapna

Aasamaana me Aaja andhera dekha
saao gayaa kahan mera bachapna deKha
Aaj SarIr ko kuCh thakte deKha
Aaj fir Apne Aap ko marte deKha

bachapna ke kya din the yaar
Khelate the kUdte the udate the gaulaal
divaalI per paTaKe uData the hajaar
Aaur kitnaa majaa udate the yaar

Khelate the kUdte the to ladte bhi the yaar
Par hum hameSaa hum kisI se JhagaDte to na the
class me jaate the to padhate BhI the
hum hameSaa Sharart karte na the

janma din pe Khate the bahut saarI mithai
Aate the saathi Aaur dete the badhai
dil de raha hai mera ro–ro ke Aaj duhai
kahan gayaa mera bachapna Aaj uski yaad hai Aai

TU EK BOOND

kabhI barsaI baadal se
kaBhI jharno se
to kaBhI uchali saagar kI lahraon se
banake ek boond.

sirf ek boond sirf- ek boond
tU ek boond sirf- ek boond hI hai
Aankhon se nikalane ko sirf- majabUr hI hai.

dard me Tapknaa Aaur KhuShI me Chalknaa
hal dil ka batanaa Aaur naa Shor machaanaa
dil ka dird- batanaa KhuShI ka hal samaJhaanaa
yahI hai kam tera boond bas AanKh se nikalanaa
Aaur bahte hI jaanaa ..

Read more: http://www.funonthenet.in/forums/index.php?topic=8693.0#ixzz0si6XbKEL

Friday, January 29, 2010

चूहों का सभा...

चूहों का सभा………………
एक मकान में चूहों की जनसंख्या बहुत थी ओ लोग मजे से रहते थे| एक दिन उस मकान का मालिक अपने घर में बिल्ली ला दिया वह बिल्ली बड़ी भयानक लगती थी| बिल्ली को बाहर आते ही सभी चूहे अपने अपने बिलों में जा कर छिप जाते थे और बहुत डरते थे| और बिल्ली रोजाना तीन या चार चूहे खा जाती थी| यह देख सुन कर सभी चूहे अपनी सभा जुटाई उस सभा मुखिया बोला की इस बिषय में लोग अपना अपना राय दे| तो सभी अपना अपना राय दिए किसी का भी राय मन को भाया नहीं तभी एक छोटा चूहा बोला की बिल्ली के गले में एक घंटी बांध दिया जाये और वह जहाँ जायेगी हम को पता चल जायेगा| यह बात सुन कर लोग खूब खुश हुए तभी एक बूढा चूहा बोला की बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा| यह सुनकर सभी लोग शांत हो गए|
यह सच ही कहा गया है की सुझाव देना आसान है लेकिन उसको करना बहुत कठिन होता है|

नहीं होता हैं|...

एक भेड़िया बहुत ही चालक था जो एक दिन जंगल से गुजर रहा था तो उसके रास्ते में एक हाथी मरा हुआ दिखाई दिया वह उसे खाना चाहा लेकिन ओ उसके चमड़े मोटे होने के कारण वह उसे खा नहीं पाया| तब वह क्या करे सोचने लगा तभी बब्बर शेर आ रहा था भेड़िया ने तुंरत बोला कैसे हो महाराज मैं ठीक हूँ तू यहाँ पर क्या कर रहे हो कुछ नहीं महाराज मैं आप के लिए भोजन तलाश करके रखा हूँ ठीक हैं लेकिन मैं किसी के शिकार किया हुआ नहीं खाता हूँ यह तुम्ही हमारे तरफ से भेट समह कर रख लो| भेड़िया बोला भला एक से पीछा छुटा| तभी शेर आ गया तो शेर से तुंरत बोल पड़ा की नमस्ते चाचा जी कहा जा रहे हैं पहले भतीजे तुम ये बताओ की तू यहाँ क्या कर रहे हो, बस मैं बब्बर शेर का भोजन को रखा रहा हूँ बब्बर शेर बोल कर गया हैं की इसके पास कोई भी शेर ,चीता इधर – उधर भटकते दिखाई दे तो हमको बताना मैं पुरे उसके जाति को समाप्त कर दूंगा| यह सुनते शेर चाचा खिसक गए| ज्यो ही इससे पीछा छुटा तब तक एक चीता को आते देखा और सोचा की इसके दात नुकीले होते हैं और तेज भी क्यों न हम इसी से हाथी के चमड़े को फड़वा डाले , तुंरत बोला क्या भांजे इतने दिन कहा थे, बहुत दुबले पतले हो गए हो क्या करू मामा! अच्छा हम बब्बर शेर के शिकार का रखवाली कर रहा हूँ तुम आओ कुछ खा लो नहीं मामा अगर उसे पता चल गया तो अरे नहीं भांजे तुम खाओ जब शेर आयेगा तब हम चिल्ला देगे, ठीक है ज्यो ही वह हाथी के घाव किया तब तक यह चिल्ला दिया और चीता भाग गया जिससे भेड़िया के पास कई दिनों तक की भोजन हो गया था| कहा जाता है की बिना चतुराई का कोई भी काम नहीं होता हैं|

Pravin singh
Azamgarh

जंगल में शेर, गधा ..

एक जंगल में शेर, गधा और लोमड़ी में मित्रता हुई| तीनो मिलकर एक योजना बनाई कि चले शिकार करे| सभी मान गए और चल दिए| तीनो ने एक हिरन के बच्चे को दौड़ाने लगे और ओ भांगते-भांगते जब थक गया तो शेर ने उसे मार गिराया| मारने के बाद शेर ने गधा से बोला कि इसको तीन भाग में बाट दो हिरन को गधा ने तीन भागो में बराबर – बराबर बाट दिया| शेर को पसन्द नहीं आया और शेर गधा को मार डाला और मार कर उसको दो भागो में बाट दिया| और बोला कि लोमड़ी तुम अपना हिस्सा लेलो| लोमड़ी ने हिरन का चौथाई भाग काट कर लेलिया| यह देख कर शेर बड़ा खुश हुआ| और बोला तुम बड़ा चालक हो तुम हिरन का चौथाई भाग क्यों लिया| लोमड़ी ने बोला कि गधा की मुर्खता को देख कर मैं समझ गया कि ओ आप कि मन चाहा भाग नहीं बाटा इसीलिए आप ने उसे मार डाला इसीलिए मैं इतना ही लिया|

प्रवीन सिंह
आजमगढ़

एक व्यापारी

एक गाँव में एक व्यापारी रहता था| ओ हर रोज अपने गधे पर नमक लाद कर बाजार ले जाता था| बाजार जाते समय रास्ते में एक नदी पड़ती थी| एक दिन गलती से गधे की पैर नदी में फिसल गया और पानी में गिर गया| लेकिन गधा को उठाने में व्यापारी ने मदद किया जब गधा पानी से बाहर निकला तो गधा को बोझ हल्का हो गया और उसको उहीं से वापस हो गया गधा को बड़ा मजा आया| तब जब वह बाजार जाता तो वह जानबुज नदी में गिर जाता था यह देख कर व्यापारी को बात समझ में आ गई| तब वह अगले दिन गधे पर रुई के लाद दिया लेकिन गधा तो गधा ही रहेगा, वह उस दिन भी नदी में गिर गया और रुई पानी को सोख कर ओ कहीं ज्यादा ही भारी हो गया| तब गधा तो चल भी नहीं पा रहा था तब व्यापारी ने एक डंडा से गधा को लगा पीटने तब से आज तक ओ गधा कभी भी नदी के पानी में नहीं गिरा|

रमाकांत
जौनपुर

एक गाँव में..

एक गाँव में दो मित्र रहते थे| एक दिन दोनों मित्र जंगल से होकर गुजर रहे थे, और दोनों ने बोला कि अगर कोई भी मुसीबत पड़ी तो एक दुसरे की मदद करेगे, यह फैसला करके दोनों निकल गए| चलते – चलते इनको रास्ते में एक भालू मिला| भालू को देखकर एक ने पेड़ पर चढ़ गया और दुसरे को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था वह जानता था कि भालू कभी मुर्दों को नहीं खाता है वह तुरन्त जमीन पर अपनी साँस रोक कर लेट गया और भालू आया उसको सूघने लगा और उसको मरा समझ कर छोड़ कर चला गया| तो दुसरे ने उतर कर पूछा कि भालू तुम्हारे कान में क्या कहा पहला बोला कि वह मुझसे यही कहा कि दगा बाज से कभी मित्रता नहीं करनी चाहिए|

प्रवीन सिंह
आजमगढ़

रवि अपने...

रवि अपने पत्नी की गोद में लेटा हुआ था! और पत्नी ने प्यार से रवि से पूछी-
पत्नी: कैसा लग रहा है जी?
रवि : ऐसे जैसे भगवान् विष्णु शेष नाग की गोद में लेटे हों

पति और पत्नी होटल में गए तभी एक औरत ने हैल्लो किया!
पत्नी: कौन थी वो?
पति: तुम दिमाग ख़राब मत करो, मैं पहले ही परेशान हूँ कि वो भी यही पूछेगी!

शीतल (रसोई से निकलते हुए) अपने पति से : सुनिए, आजकल मैं बहुत खुबसूरत होती जा रही हूँ!
पति: तुमने कैसे जाना?
शीतल : देखो न, आजकल मेरी सुन्दरता देखकर रोटियां भी जलने लगी है!